अयोध्या मामले पर भाजपा ने पार्टी प्रवक्ताओं को दिए दिशा-निर्देश

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)| सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इससे पहले अयोध्या जमीन विवाद मामले में कभी भी फैसला आ सकता है। अब इसी के अंतर्गत क्या करना है और क्या नहीं करना, इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने प्रवक्ताओं और सोशल मीडिया टीम को दिशा-निर्देश दिए हैं। दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में सोमवार को हुई बैठक में सबसे पहले भाजपा के टीवी पर आने वाले प्रवक्ताओं को ‘शिक्षित’ किया गया।

एक भाजपा पदाधिकारी ने कहा, “यह सच है कि हमारे कई नेता लंबे समय से लंबित मामले (अयोध्या जमीन विवाद) से अच्छी तरह से परिचित हैं। इसमें रविशंकर जी (केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद) ऐसे नेता हैं, जो पूरे मामले की बातों को अपनी उंगलियों पर गिना सकते हैं। इसी के चलते हमें बारीकियों को देखने में समस्या नहीं हुई।”


उन्होंने आगे कहा, “लेकिन प्रकाश जावड़ेकर जी या रविशंकर प्रसाद जी जैसे प्रवक्ताओं की आज सरकार में बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका है और पार्टी का मानना है कि युवा प्रवक्ताओं की नई नस्ल का एक बड़ा वर्ग इस मामले के समय के साथ अच्छी तरह से वाकिफ नहीं है। इसलिए पार्टी ने उन्हें इस सदी की लंबी कानूनी उलझन के बारे में संक्षेप में बताने का फैसला किया।”

हालांकि, बैठक में इन टीवी चेहरों को नियमित रूप से प्राइम टाइम पर ‘बहस’ करने के लिए सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया गया, लेकिन मुख्य संदेश यह दिया गया है कि अयोध्या मामले में फैसला सुनाए जाने के बाद एक ‘पार्टी लाइन’ जारी होने तक वह फैसले पर क्या कहना है, इसका निर्णय ना लें और फैसले पर टिप्पणी न करें।

बैठक में शामिल सभी लोगों को कहा गया कि वह राम मंदिर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष व गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को सुनें।


 

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