सीएम नीतीश कुमार ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग, बिहार में फिर लागू हो सकता है पूर्ण लॉकडाउन!

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Bihar CM Nitish Kumar said that wrong happened to our officer in Mumbai

बिहार में कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण ने अब नीतीश सरकार (Nitish Kumar) की मुश्किले तेजी से बढ़ रही है। पिछले कुछ महीनों से नीतीश सरकार इस बात के तमाम दावे कर रही थी कि हमने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए पुख्ता इंतेजाम किए है। लेकिन अब बिहार के भयावह हालत बता रहे है कि सरकार की नाकामी की वजह से राज्य में कोरोना का संक्रमण तेजी के साथ बढ़ा  है।

इसी का नतीजा है कि एक बार फिर से पूरे बिहार में फिर से लॉकडाउन लागू हो सकता है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। एक खबर के मुताबिक ये लॉकडाउन 31 जुलाई तक हो सकता है। मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सोमवार को कहा कि पूरे राज्य में लॉकडाउन लगाने पर मंगलवार को निर्णय लिया जाएगा।


राज्य में पटना समेत कई जिलों में लागू लॉकडाउन को और व्यापक रूप दिए जाने की सरकार की तैयारी है, ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ने के साथ ही इसके प्रसार को भी रोका जा सके। बिहार समेत पूरे देश में 24 मार्च की रात से 31 मई तक पूर्ण लॉकडाउन रहा। इसके बाद जून में अनलॉक-1 और फिर जुलाई में अनलॉक-2 लागू हुआ है।

एहतियात के तौर पर राज्य के सभी जिला न्यायालयों में एक सप्ताह तक कोई भी प्रवेश नहीं करेगा। चाहे किसी को रिमांड करना हो या रिलीज करना हो। सभी न्यायिक अधिकारी अपने आवास से ही न्यायिक कार्य करेंगे। इस आशय का निर्देश पटना हाइकोर्ट के महानिबंधक ने सूबे के सभी जिला जज को दिया है।

तेजी से बढ़ रही संक्रमितों की संख्या

बीते एक हफ्ते में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण इस मसले पर विचार किया जा रहा है। हालांकि जांच का दायरा बढ़ने और अधिक संख्या में जांच होने के कारण भी संक्रमितों की संख्या बढ़ी है। अभी कई जिलों में स्थानीय प्रशासन ने लॉकडाउन दो से सात दिनों के लिए लागू किया है। पटना में 16 जुलाई तक लॉकडाउन है।


स्वस्थ होने की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा

पिछले दो दिनों से राज्य में रोज एक हजार से अधिक कोरोना संक्रमित राज्य में मिले हैं। हालांकि बिहार में कोरोना संक्रमितों के ठीक होने की दर अभी 71 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अच्छी है। लेकिन कई दूसरी पार्टियां का कहना है कि बिहार के आंकड़े सही नहीं बताए जा रहे है। जबकि राज्य में कोरोना की वजह से हालात बद से बदतर हो चुके है।

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