बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक बने लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर

बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक बने लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक (Dr. Virendra Kumar Khatik)  को 17वीं लोकसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker) चुना गया है। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार सभी सांसदों को शपथ दिलाएंगे। इससे पहले बरेली से सांसद संतोष गंगवार और सुल्तानपुर से सांसद मेनका गांधी के नाम सामने आए थे। हालांकि बीजेपी नेतृत्व ने दोनों नाम खारिज कर दिए थे।

कौन हैं वीरेंद्र कुमार

27 फरवरी, 1954 को जन्मे वीरेंद्र कुमार बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हैं। 1996 में सागर से 11वीं लोकसभा में पहली बार सांसद बने। तब से उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2004 तक सागर से जीते। परिसीमन के बाद उन्होंने 2009 और 2014 में टीकमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता। वीरेंद्र कुमार मध्य प्रदेश में भाजपा का दलित चेहरा हैं। एमपी के सागर स्थित डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और चाइल्ड लेबर में पीएचडी की है। उन्होंने 1975 में लोकनायक जय प्रकाश नारायण द्वारा शुरू किए गए आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।


क्यों नियुक्त किया जाता है प्रोटेम स्पीकर?

प्रोटेम स्पीकर, चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक संसद का कामकाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानी संसद का संचालन करता है। सीधे कहें तो यह कामचलाऊ और अस्थायी स्पीकर होता है। बेहद कम वक्त के लिए इन्हें चुना जाता है।

अभी तक ज्यादातर मामलों में परंपरा रही है कि सदन के वरिष्ठतम सदस्यों में से किसी को यह जिम्मेदारी दी जाती है। प्रोटेम स्पीकर तभी तक अपने पद पर रहते हैं जब तक स्थायी अध्यक्ष का चयन न हो जाए। हालांकि, केवल चुनावों के बाद ही प्रोटेम स्पीकर की जरूरत नहीं होती बल्कि उस हर परिस्थिति में प्रोटेम स्पीकर की जरूरत पड़ती है जब संसद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद एक साथ खाली हो। यह उनकी मृत्यु की स्थिति के अलावा दोनों के एक साथ इस्तीफा देने की परिस्थितियों में भी हो सकता है।


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