देश के अगले CJI बोबडे बोले, कुछ के पास बोलने की पूरी आज़ादी, कुछ बोलने पर झेल रहे हमले

देश के अगले CJI बोबडे बोले, कुछ के पास बोलने की पूरी आज़ादी, कुछ बोलने पर झेल रहे हमले

देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने जा रहे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत की है। जस्टिस बोबडे इस मौके पर अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उन्होंने कहा कि इसके दो पक्ष हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो सार्वजनिक तौर पर और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर कुछ भी कहकर बच निकलते हैं। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपनी अभिव्यक्ति के चलते हमलों का शिकार होना पड़ता है।

अभिव्यक्ति की आजादी पर

उन्होंने आगे कहा, ‘यह विवाद स्पष्ट है। कुछ लोगों को अभिव्यक्ति की काफी आजादी है। ऐसा दौर कभी नहीं रहा, जब कुछ लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी का कोई दायरा तय रहा हो।’ उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ कुछ लोगों को बिना कहे ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि जस्टिस बोबडे एक ऐसे दौर में CJI बनने जा रहे हैं जब देश में अभिव्यक्ति की आजादी पर नये सिरे से बहस चल रही है।


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महिला जजों की कम संख्या पर

महिला जजों की कम संख्या को लेकर पूछे जाने पर जस्टिस बोबडे ने कहा, ‘मैं इस उद्देश्य से प्रयास करूंगा और बिना किसी पक्षपात के कोशिश करूंगा कि उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों का चयन बढ़े। लेकिन समस्या उनकी उपलब्धता की भी है। हाई कोर्ट में जज के तौर पर उनकी 45 वर्ष आयु होनी चाहिए। इसलिए हम रातोंरात संवैधानिक अदालतों में महिला जजों की संख्या नहीं बढ़ा सकते। यह सिस्टम के साथ ही होगा।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला जजों की संख्या कम होने की वजह किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी बड़ी वजह उनकी कम उपलब्धता रही है। इसके अलावा भी कुछ कारण हो सकते हैं।


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