UP: बागपत लोकसभा सीट: सीधे मुकाबले में रालोद हासिल करना चाहेगी अपनी परंपरागत सीट

बागपत लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश: वर्तमान सांसद, उम्मीदवार, मतदान तिथि और चुनाव परिणाम

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में उत्तर प्रदेश की 8 सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान हुए। इन्हीं 8 सीटों में एक सीट बागपत है जहां मतदान सम्पन्न हुए। इस सीट पर सीधा मुकाबला भाजपा के मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह और रालोद के चौधरी जयंत सिंह के बीच है।

उत्तर प्रदेश के प्रथम चरण के चुनाव के दौरान 63.69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने-अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। बागपत संसदीय क्षेत्र में 63.09 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं 2014 में मतदान प्रतिशत 66.97 था।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बागपत लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र एक बार फिर से नया सांसद चुनने के लिए तैयार है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सत्यपाल सिंह ने रालोद प्रमुख अजित सिंह को 2 लाख से अधिक वोटों से मात दी थी। यहां कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी की ओर से मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन के तहत यह सीट आरएलडी के हिस्से गई है। वहीं, कांग्रेस ने मुजफ्फरनगर से अजित सिंह और बागपत से जयंत सिंह के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। बल्कि, कांग्रेस रालोद का समर्थन कर रही है। इसलिए इस सीट पर अब सीधा मुकाबला बीजेपी और गठबंधन के उम्मीदवार के बीच है।

बागपत में पहले चरण के अंतर्गत 11 अप्रैल को मतदान हुए। यहां 63.09 प्रतिशत मतदाताओं नें मतदान दिए।

बागपत लोकसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई। बागपत लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं – सिवालखास, छपरौली, बड़ौत, बागपत और मोदीनगर। इसमें सिवालखास मेरठ जिले की और मोदीनगर गाजियाबाद जिले से आती हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में इसमें सिर्फ छपरौली में राष्ट्रीय लोकदल ने जीत दर्ज की थी, जबकि बाकी 4 सीटों पर बीजेपी जीती थी।


मेरठ और बागपत जैसे क्षेत्र से जुड़े बागपत में 16 लाख से भी अधिक वोटर हैं। इनमें करीब 4 लाख जाट वोटर हैं। जाट समुदाय के वोटरों के बाद यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। यहां मुस्लिम मतदाताओ की संख्या लगभग 3.50 लाख है। इनके अलावा इस सीट पर 1.50 लाख के करीब दलित मतदाता है। चौथी बड़ी आबादी यादवों की है जिनकी संख्या 50 हजार के लगभग है। गुर्जर और राजपूत दोनों जाति के वोटर भी 1 लाख से ऊपर है। इसके अलावा ब्राह्मण त्यागी की जनसख्या लगभग 70 हजार है, जबकि पिछड़े और अन्य पिछड़े वोटर भी यहां काफी तादाद में है। यही कारण है कि रालोद यहां पर मजबूत है।

बागपत लोकसभा का इतिहास

पहले चुनाव में यहां जनसंघ और दूसरे चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। लेकिन इमरजेंसी के बाद यहां 1977 में हुए चुनाव से ही क्षेत्र की राजनीति पूरी तरह से बदल गई। 1977, 1980 और 1984 में लगातार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह यहां से चुनाव जीते। उनके बाद बेटे अजित सिंह 6 बार यहां से सांसद रहे। 1989, 1991, 1996, 1999, 2004 और 2009 में अजित सिंह बागपत से सांसद रहे ,सिर्फ 1998 में हुए चुनाव में यहां हार का सामना करना पड़ा और 2014 में तो वह तीसरे नंबर पर ही पहुंच गए।

2014 में चली मोदी लहर के दम पर बीजेपी ने यहां परचम लहराया और मुंबई पुलिस के कमिश्नर रह चुके सत्यपाल सिंह सांसद चुने गए। जबकि अजित सिंह इस सीट पर तीसरे नंबर पर रहे थे। लेकिन इस बार बीजेपी की राह आसान नहीं है। आरएलडी की यह परंपरागत सीट रही है। चौधरी चरण सिंह 1977, 1980 और 1984 में लगातार चुनाव जीते हैं। जयंत के पिता और आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह 6 बार सांसद रहे। जाट, मुस्लिम और दलित मतों के सहारे आरएलडी इस सीट को बीजेपी से छीनने की कवायद कर रही है।

निवर्तमान सांसद: सत्यपाल सिंह

लोकसभा चुनाव 2014

सत्यपाल सिंह, भारतीय जनता पार्टी – 4,23,475

गुलाम मोहम्मद, समाजवादी पार्टी – 213,609

चौधरी अजित सिंह, राष्ट्रीय लोक दल – 199,516

2019 लोकसभा चुनाव के लिए प्रमुख उम्मीदवार

  • सत्यपाल सिंह, बीजेपी
  • चौधरी जयंत सिंह, रालोद

पहले चरण के चुनाव लिए महत्वपूर्ण तिथियां

अधिसूचना  जारी 18 मार्च
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 25 मार्च
नामांकन पत्र की जांच 26 मार्च
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 28 मार्च
मतदान की तारीख 11 अप्रैल
मतगणना की तारीख 23 मई

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