बुलंदशहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश: वर्तमान सांसद, उम्मीदवार, मतदान तिथि और चुनाव परिणाम

बुलंदशहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश: वर्तमान सांसद, उम्मीदवार, मतदान तिथि और चुनाव परिणाम

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र एक बार फिर से नया सांसद चुनने को तैयार है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के भोला सिंह ने प्रचंड जीत हासिल की थी। दूसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार जाटव रहे थे। कुछ महीने पहले गोहत्या के शक में हुई हिंसा के बाद यह क्षेत्र पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। इस चुनावी समर में बुलंदशहर सीट से 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला बीजेपी के निवर्तमान सांसद भोला सिंह, कांग्रेस के बंशी सिंह और बसपा के योगेश वर्मा के बीच है। 4 निर्दलीय प्रत्याशियों के अलावा मैदान में 6 अन्य छोटे दलों के उम्मीदवार भी हैं। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित बुलंदशहर लोकसभा सीट पर 2019 में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

बुलंदशहर लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है।


बुलंदशहर लोकसभा सीट का इतिहास

बुलंदशहर, का प्राचीन नाम बरन था। इसका इतिहास लगभग 1200 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना अहिबरन नाम के राजा ने की थी। मड किला और क्लॉक टॉवर यहा के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। लखनऊ से इसकी दूरी 517.1 किलोमीटर है और दिल्ली से इसकी दूरी 132.1 किलोमीटर है। इस शहर के पास से काली नदी बहती है। बुलंदशहर संसदीय सीट के राजनीतिक इतिहास पर नज़र डालें तो यह 1952 से ही शुरू होता है। 1952 से लेकर 1971 तक यहां हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की, लेकिन उसके बाद यहां पर मतदाताओं ने लगातार हुए चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को तवज्जो दी। 1977 में भारतीय लोक दल, 1980 में जनता दल ने यहां कांग्रेस को करारी मात दी थी। लेकिन 1984 में कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही। हालांकि 1989 के बाद से कांग्रेस यहां पर वापसी के लिए संघर्ष कर रही है।

1989 चुनाव में जनता दल के जीत दर्ज करने के बाद 90 के दशक में मंदिर निर्माण के दौर में 1991 से लेकर 2004 तक लगातार पांच बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव हासिल की। इस दौरान 1991 से 1999 तक बीजेपी के छतरपाल सिंह ने इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा। 2004 में भी बीजेपी को यहां से जीत मिली थी। 2009 में यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कमलेश वाल्मिकी ने बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में देश में चली मोदी लहर का असर यहां भी दिखा और बीजेपी ने जीत हासिल की। 2014 में इस सीट पर भाजपा के भोला सिंह ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। चुनाव में भोला सिंह को 60 फीसदी करीब 6 लाख वोट मिले थे। जबकि, बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार जाटव को 1 लाख 82 हजार वोट मिले थे। तब सिर्फ 58 फीसदी मतदान हुआ था।

मायावती भी लड़ चुकी हैं चुनाव

वर्ष 1991 में बसपा सुप्रीमो मायावती भी इस सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। उन्हें चौथे नंबर पर संतोष करना पड़ा था। चुनाव में एक बूथ पर विवाद होने पर मायावती को जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद फिर कभी उन्होंने बुलंदशहर से चुनाव नहीं लड़ा।


दो पूर्व सीएम रहे चुके हैं सांसद

बुलंदशहर सीट से यूपी के दो पूर्व सीएम बाबू बनारसी दास और कल्याण सिंह भी सांसद बनकर लोकसभा में पहुंचे। बाबू बनारसी दास वर्ष 1983 में उपचुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए। जबकि कल्याण सिंह वर्ष 2004 में भाजपा के टिकट पर बुलंदशहर से सांसद बने। जनता दल की लहर में 1989 में जनता दल के टिकट पर सरवर हुसैन सांसद बनकर केंद्र सरकार में मंत्री बने थे।

बुलंदशहर संसदीय सीट का समीकरण

बुलंदशहर लोकसभा के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं – अनूपशहर, बुलंदशहर, डिबाई, शिकारपुर और स्याना। 2017 विधानसभा चुनाव में इन सभी 5 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है। 2014 में लोकसभा चुनाव के अनुसार इस सीट पर 17 लाख से अधिक वोटर हैं। इनमें 9 लाख से अधिक पुरुष और करीब 8 लाख महिला वोटर हैं। बुलंदशहर में करीब 77 फीसदी हिंदू और 22 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती हैं।

आपको बता दें कि बुलंदशहर की ही स्याना विधानसभा सीट वही जगह है जहां पर 2018 के आखिर में गोहत्या के शक में हिंसा हुई थी। इस हिंसा में एक पुलिसकर्मी और एक युवक की मौत हो गई थी। बुलंदशहर हिंसा ने राजनीतिक तौर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

भाजपा को अपने परंपरागत लोधी, ठाकुर, ब्राह्मण, वैश्य सहित सवर्ण मतों पर भरोसा है। भाजपा प्रत्याशी को कुछ जगह पर विरोध का सामना तो करना पड़ रहा है मगर, मोदी के नाम पर वोट की बात भी लोग कहते दिख रहे हैं। जबकि बसपा प्रत्याशी दलित-मुस्लिम और सपा-रालोद के परंपरागत मतदाताओं पर उम्मीद लगाए हुए है। जाट मतदाताओं का रुझान अभी पूरी तरह साफ नजर नहीं आ रहा।

भाजपा जाट मतों को राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही है। उधर, रालोद का समर्थन होने पर बसपा प्रत्याशी जाट मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने का हरसंभव प्रयास कर रहा है। जाटों का रुझान काफी हद तक परिणाम तय करेगा। इस सीट पर सीधा मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच है। कांग्रेस प्रत्याशी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहा है। मगर, इसमें कितनी सफलता हासिल होती है यह आने वाला वक्त ही बता पाएगा।

निवर्तमान सांसद : भोला सिंह

2014 का लोकसभा चुनाव

भोला सिंह, भाजपा  – 6,04,449
प्रदीप जाटव, बसपा – 1,82,476
कमलेश वाल्मीकि, सपा – 128737
अंजु मुस्कान, रालोद-कांग्रेस 59,116

2019 लोकसभा चुनाव के लिए प्रमुख उम्मीदवार

  • भोला सिंह, बीजेपी
  • योगेश वर्मा, बसपा
  • बंशी सिंह, कांग्रेस

दूसरे चरण के चुनाव लिए महत्वपूर्ण तिथियां

अधिसूचना  जारी 19 मार्च
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 26 मार्च
नामांकन पत्र की जांच 27 मार्च
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 29 मार्च
मतदान की तारीख 18 अप्रैल
मतगणना की तारीख 23 मई

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