पुण्यतिथि: अपनी लेखनी के दम पर ‘स्टार’ बने लोकप्रिय ​व्यंग्यकार तारक मेहता

पुण्यतिथि: अपनी लेखनी के दम पर 'स्टार' बने लोकप्रिय ​व्यंग्यकार तारक मेहता

तारक मेहता का नाम सुनते ही हमारे मन में सबसे पहले टीवी पर आने वाले सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ और इसके रोचक पात्रों का खयाल आता है। हममें से बहुत कम लोगों को यह पता है कि यह सीरियल गुजराती भाषा के प्रसिद्ध व्यंग्यकार और लेखक तारक मेहता के एक साप्ताहिक अखबार के कॉलम से प्रेरित है। तारक मेहता अपने हास्य लेखन के लिए मशहूर रहे। उनके लेखन का सफ़र 1971 में गुजराती और मराठी में निकलने वाली साप्ताहिक पत्रिका ‘चित्रलेखा’ से शुरू हुआ था। उन्होंने 80 किताबें लिखीं। ‘चित्रलेखा’ में वे ‘दुनिया ने ऊंधा चश्मा’ नाम से कॉलम लिखा करते थे। बाद में इसी कॉलमों को एक किताब की शक़्ल दी गई।

26 दिसंबर, 1929 को अहमदाबाद में तारक मेहता का जन्म हुआ। गुजराती में तारक का मतलब तारा यानि स्टार होता है। तारक मेहता आज भी गुजरातियों के बीच अपनी लेखनी के दम पर स्टार हैं। गुजरात में तारक मेहता की आत्मकथा एक्शन रिप्ले बड़े चाव से पढ़ी जाती है। उन्होंने कई नाटकों का रूपांतरण किया, कई नाटक भी लिखे। तारक मेहता ने कई हास्य किताबों का गुजराती में अनुवाद भी किया था।


2008 में सब टीवी ने ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ शुरू किया। इस सीरियल में खुद तारक मेहता नाम का भी एक पात्र है। पिछले 11 सालों से यह सीरियल हिंदी टीवी जगत के मनोरंजक और सफलतम सीरियलों में से एक माना जाता है। तारक मेहता अपने लंबे जीवनकाल में 80 से ज्यादा किताबें लिखी हैं। जिसमें प्रमुख हैं: ए दुनिया पंजारापोले, एक्शन रीप्ले, अल्बेलुन अमेरिका-वानथेलुन अमेरिका, चंपकलाल तापुनी जुगलबंदी, बेताज बताली-पोपटलाल तराज शामिल हैं।

1 मार्च, 2017 को तारक मेहता का 88 साल में निधन हो गया। उनकी मौत के बाद पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा था कि तारक मेहता का लेखन भारत की विभिन्नता में एकता का प्रतीक है। पीएम ने कहा था कि उन्होंने अपने लेखन से गुजरात के लोगों को हंसाया।


तारक मेहता की गुजरात और गुजरातियों के बीच लोकप्रियता और प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे, तब वे समय निकाल तारक मेहता के कार्यक्रम का उद्घाटन करने आए थे और उन्होंने उनसे कई मुद्दों पर बातचीत भी की थी। तारक मेहता को उनकी रचनात्मकता के लिए साल 2015 में पदमश्री से भी सम्मानित किया गया था।


 

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