हरियाणा की राजनीति से साफ हुई इनेलो, चौटाला परिवार का वजूद अभी भी कायम

चंडीगढ़, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)| हरियाणा की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने 2014 के विधानसभा चुनावों में 19 सीटें जीती थीं, मगर इस चुनाव में यह पार्टी प्रदेश से लगभग खत्म हो गई है। जननायक जनता पार्टी (जजपा) इनेलो से निकली है। इसके गठन को अभी एक साल भी नहीं हुआ है, इसके बावजूद 90 सदस्यीय विधानसभा में जजपा 10 सीटें जीतकर अगली सरकार के गठन में एक प्रमुख गेमचेंजर बनकर उभरी है। इनेलो प्रदेश में एकमात्र सीट हासिल कर सकी है।

दिलचस्प बात यह है कि मूल पार्टी इनेलो बेशक धराशायी हो गई, लेकिन इसके संस्थापक और पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की तीसरी और चौथी पीढ़ी के नेता अपनी-अपनी सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रहे।


चुनाव जीतने वालों में चौटाला वंश के अभय सिंह चौटाला, दुष्यंत चौटाला, नैना चौटाला शामिल हैं।

दिवंगत देवीलाल के बड़े पड़पोते व नवगठित जजपा प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने जींद जिले की उचाना कलां से जीत दर्ज की है। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह की पत्नी व मौजूदा विधायक प्रेमलता (59) को मात दी।

जजपा ने सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा।


दुष्यंत के चाचा और देवीलाल के पोते अभय सिंह चौटाला ने सिरसा की ऐलनाबाद सीट बरकरार रखी है।

दुष्यंत की मां नैना चौटाला जजपा के टिकट पर भिवानी जिले के बड़हरा से जीतीं हैं।

भाजपा ने सिरसा जिले के डबवाली से देवीलाल के पोते आदित्य देवी लाल को मैदान में उतारा, लेकिन वह कांग्रेस के अमित सिहाग से हार गए।

दुष्यंत ने कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है। वह दिसंबर 2018 में चौटाला परिवार में पनपे मनमुटाव के बाद अलग हो गए।

पूर्व सांसद दुष्यंत के पिता अजय चौटाला चार बार के मुख्यमंत्री और इनेलो अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे हैं।

अभय चौटाला ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार बनाने में हाथ मिलाने की पेशकश को ठुकरा दिया।

चौटाला ने मीडिया से कहा, “मेरी पार्टी कभी भी कांग्रेस का समर्थन नहीं करेगी।”

 

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