अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2019 : घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में जानिए विस्तार से

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2019 : घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में जानिए विस्तार से

घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाना है। इस अधिनियम के 26 अक्टूबर, 2006 को लागू किया गया था।

क्या है घरेलू हिंसा

घरेलू दायरे में हिंसा को घरेलू हिंसा कहा जाता है। किसी भी महिला का शारीरिक, जीवन को खतरा , मौखिक, अपमान या तिरस्कार करना, महिला की गरिमा का उल्लंघन करना, मनोवैज्ञानिक , यौन शोषण, भावनात्मक दुर्व्यवहार यानि अपमान ,उपहास या गाली देना और आर्थिक शोषण अर्थात आर्थिक या वित्तीय संसाधनों से वंचित करना जिसकी वह हकदार है या मानसिक रूप से परेशान करना घरेलू हिंसा के अंतर्गत आता है।


क्या है घरेलू हिंसा अधिनियम

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 महिलाओं को किसी भी प्रकार से होने वाले शोषण के विरुद्ध सरंक्षण प्रदान करता है। यह महिला बाल विकास द्वारा संचालित किया जाता है। शहर में महिला बाल विकास द्वारा जोन के अनुसार आठ संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जो घरेलू हिंसा से पीड़‍ित महिलाओं की शिकायत सुनते हैं और पूरी जांच पड़ताल करने के बाद प्रकरण को न्यायालय भेजते हैं। यह अधिनियम ऐसी महिलाओं के लिए है जो घर के अंदर किसी किसी भी प्रकार के हिंसा से पीड़ित हैं । घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत प्रताड़ित महिला किसी भी वयस्क पुरुष को अभियोजित कर सकती है अर्थात उसके विरुद्ध मामला दर्ज करा सकती हैं।

कौन करा सकता है शिकायत दर्ज ?

घरेलू हिंसा के मामले में खुद पीड़ित महिला शिकायत दर्ज करा सकती है। इस अधिनियम के तहत यह जरूरी नहीं है कि पीड़ित व्यक्ति ही शिकायत दर्ज कराए। कोई भी व्यक्ति जिसे लगता है कि घरेलू हिंसा की कोई घटना हुई है या हो रही है या जिसे ऐसा अंदेशा भी है कि ऐसी घटना घटित हो सकती है, इस अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवा सकता है। सुरक्षा अधिकारी के अलावा पीड़ित महिला ‘सेवा प्रदाता’ से भी संपर्क कर सकती है, सेवा प्रदाता फिर शिकायत दर्ज कर ‘घरेलू हिंसा घटना रिपोर्ट’ बना कर मजिस्ट्रेट और संरक्षण अधिकारी को सूचित करता है।


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