जयंती विशेष: भारत के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन, जिन्हें देश महान शिक्षाविद् के तौर पर याद करता है

पुण्यतिथि विशेष: भारत के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन, जिन्हें देश महान शिक्षाविद् के तौर पर याद करता है

Teachers’ Day 2019 : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan) भारतीय इतिहास का वह नाम है जिन्होंने न केवल राजनीति में अहम् भूमिका निभाई, बल्कि एक महान शिक्षाविद् के तौर पर अध्यापक के महत्त्व और कार्यों को समझाया। आज भारतीय इतिहास के इस महान शिक्षाविद की जयंती है। स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहे सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन (Sarvepalli Radhakrishnan) को विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों में से एक माना जाता है।

डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा लूनर्थ मिशनरी स्कूल, तिरुपति और वेल्लूर में से करने के बाद, उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की। हमेशा से पढाई में अव्वल रहे डॉ. राधाकृष्णन ने 12 वर्ष की आयु में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया था। उन्होंने दर्शन शास्त्र से एम.ए. किया और 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर काम करने लगे।उन्होंने 40 वर्ष तक शिक्षक के तौर पर काम किया।


1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहने के दौरान डॉ. राधाकृष्णन ने कोई सैलरी भी नहीं ली थी। इसके बाद 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के तौर पर काम किया। राधाकृष्णन 1939 से 1948 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया। अपने विचारों के लिए डॉ. राधाकृष्णन को पुरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ अध्यापकों में से एक माना गया।

संविधान सभा के सदस्य रहे डॉ. राधाकृष्णन को वर्ष 1952 में भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया। 1962 में वह भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनाये गए। 1967 में लगातार दूसरी बार वह वह भारत के राष्ट्रपति चुने गए।

1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा ‘भारत रत्न’ की उपाधि से सम्मानित डॉ. राधाकृष्‍णन को ब्रिटिश शासनकाल में ‘सर’ की उपाधि भी दी गई थी। 1961 में जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा डॉ. राधाकृष्णन को ‘विश्व शांति पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।


डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन ने शिक्षाविद् के तौर पर समाज को अध्यापन का तरीका सिखाया। उनका मानना था कि अच्छा शिक्षक वो है, जो ताउम्र सीखता रहता है और अपने छात्रों से सीखने में भी कोई परहेज नहीं रखता। डॉ. राधाकृष्‍णन के इन महान विचारों और शिक्षक के तौर पर उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उनके जन्मदिन 5 सितम्बर को भारत में ‘अध्यापक दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है।

डॉ. राधाकृष्‍णन ने अपने जीवन काल में गौतम बुद्ध, जीवन और दर्शन, धर्म और समाज, भारत और विश्व आदि पर किताबें भी लिखीं। 17 अप्रैल 1975 में लम्बी बीमारी के बाद  उनका निधन हो गया था।


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