CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान को असम रायफल्स के जवान बलवान सिंह का जवाब

CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान को असम रायफल्स के जवान बलवान सिंह का जवाब

पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया और समाज के अन्य हिस्सों में CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान (Khushboo Chauhan) के भाषण ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं। खुशबू चौहान ने यह भाषण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) द्वारा 27 सितंबर को मानवाधिकार विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में दिया था।

उनके भाषण पर एक बहस भी हुई, किसी ने तारीफ की और किसी ने आलोचना। बाद में CRPF को भी इसपर सफाई देनी पड़ी। अब इसी प्रतियोगिता में दिया गए एक और भाषण का वीडियो सामने आया है, जिसमें असम रायफल्स में रायफलमैन बलवान सिंह (Rifleman Balwan Singh Assam Rifles) भी इसी मुद्दे पर बोल रहे हैं। लेकिन उनके तर्क पूरी तरह से अलग हैं और अपने संबोधन में कहा कि बहादुरी किसी को मारने में नहीं बल्कि बचाने में है।


सोशल मीडिया पर बलवान सिंह का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बलवान सिंह ने अपने भाषण में मानवाधिकार नियमों का पालन किए जाने की वकालत की है। अपने संबोधन में बलवान सिंह कहते हैं कि कहा जाता है कि मानवाधिकारों का अनुपालन कर पाना असंभव है, लेकिन आम लोगों के अधिकारों की रक्षा आखिर करेगा कौन?

बम-बंदूक से शांति नहीं आ सकती, कश्मीर-छत्तीसगढ़ हैं उदाहरण

असम रायफल्स के जवान ने अपने भाषण में उत्तर-पूर्व में फर्जी मुठभेड़, देश भर में पुलिस फायरिंग और कश्मीर-छत्तीसगढ़ की बात की। उन्होंने कहा कि 2000 से लेकर 2012 तक मणिपुर में पुलिस-सुरक्षाबलों के बीच 1000 फर्जी मुठभेड़ दर्ज हुईं। 2016 में देश भर में पुलिस फायरिंग में 92 नागरिक मारे गए, लाठीचार्ज में भी कई लोगों की मौत हुई। बहादुरी किसी को मारने में नहीं बचाने में होती है। अगर बम-बंदूक के दम पर शांति स्थापित होती तो कश्मीर-छत्तीसगढ़ में शांति हो गई होती।

जवान बलवान सिंह ने अपनी स्पीच में कहा कि क्रोध को क्रोध से नहीं प्यार से जीता जाता है, अब्राहम लिंकन ने भी गृह युद्ध खत्म करने के लिए दुश्मन को प्यार से जीतने की बात कही थी। असली जंग लोगों के दिल में लड़ी जाती है, इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन कर नहीं बल्कि इनका सम्मान करके जीता जा सकता है। क्योंकि जहां मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है वहां ही पान सिंह तोमर को डाकू बनना पड़ता है।

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