पटना — लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की, और उसके बाद जो बयान दिया, वह राज्य की चुनावी राजनीति का तापमान बढ़ा सकता है। कभी नीतीश कुमार के कट्टर आलोचक रहे चिराग अब कह रहे हैं कि “बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है।”
यह बयान तब आया है जब बिहार में अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं, और सभी NDA घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर अंदरूनी हलचल चल रही है।
मोदी के ‘हनुमान’ की वापसी?
चिराग पासवान, जो अक्सर खुद को नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते रहे हैं, ने इस बयान के साथ भाजपा को भी स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा,
“मेरे प्रधानमंत्री मेरे दिल में रहते हैं…अगर जरूरत पड़ी तो मैं दिल फाड़कर दिखा दूंगा।”
यह वही चिराग पासवान हैं जिन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ा था, लेकिन आज वह नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को मजबूत बताते हैं।
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दलित वोटबैंक पर नजर
इस बार चिराग की रणनीति बदली हुई है। दलित वोटबैंक, खासकर पासवान समुदाय, पर पकड़ मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी 16.04% है। वहीं, पासवान जाति राज्य की दूसरी सबसे बड़ी दलित जाति है, जिसकी आबादी 5.311% है। यही वजह है कि चिराग अब ‘बहुजन-भीम संकल्प समागम’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए समाज के निचले तबकों तक सीधा जुड़ाव बना रहे हैं।
क्या बदल गई है LJP (रामविलास) की चाल?
LJP (रामविलास) अब BJP के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश में है, ताकि उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर सीटों की हिस्सेदारी मिल सके। चिराग की नीतीश के प्रति नर्म होती भाषा इस नई राजनीतिक केमिस्ट्री का इशारा है।






