Kanpur Encounter: सस्पेंड एसओ विनय तिवारी पुलिस हिरासत में, विकास दुबे का साथ देने का लगा आरोप

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Police arrest SHO Vinay Tiwari the official accused of helping the gangster

कानपुर केस में विकास दुबे के लिए मुखबिर के शक में चौबेपुर थाने के सस्पेंड किए गए एसओ को हिरासत में ले लिया गया है। जांच टीम को शक है कि विनय तिवारी ने ही विकास को इस बात की जानकारी दी थी कि रात में उसको पकड़ने के लिए पुलिस उसके घर पहुंचेगी। इसके बाद विकास ने पुलिस पर हमला करने की योेजना बनाई और आठ पुलिस वाले इस हमले में मारे गए।

विनय तिवारी के साथ ही बीट प्रभारी केके शर्मा को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आईजी मोहित अग्रवाल और एसएसपी दिनेश कुमार पी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। विनय तिवारी शुरू से ही इस मामले में शक के घेरे में था। वह उस टीम में सबसे पीछे चल रहा था जो विकास के घर दबिश देने गई थी।


एक खबर में तो ये भी कहा तो यह भी जा रहा है विकास ने रास्ते में जसीबी लगाकर पुलिस का रास्ता रोकने की कोशिश की थी। विनय उसी जेसीबी के पीछे छुपा था। घटना के बाद से ही विनय जांच एजेंसियों के रडार पर था। प्रारंभिक जांच के बाद से ही उसे सस्पेंड कर दिया गया था। सीओ बिल्हौर रहे देवेंद्र मिश्र ने 14 मार्च 2020 को चौबेपुर थाने का निरीक्षण किया था।

इस दौरान मालूम हुआ कि 13 मार्च को विकास दुबे के खिलाफ वसूली के लिए धमकी, बलवा, मारपीट, जान से मारने की धमकी की एफआईआर दर्ज हुई थी। इस केस की जांच चौबेपुर थाने के दरोगा अजहर इशरत को सौंपी गई। अगले ही दिन विवेचक अजहर ने मुकदमे से वसूली के लिए जान से मारने की धमकी देने की धारा 386 हटा दी।

जब सीओ ने पूछा तो दरोगा ने बताया कि थानेदार के कहने पर हटाई गई। इसी दिन सीओ ने चौबेपुर थानेदार रहे विनय तिवारी के खिलाफ एसएसपी को रिपोर्ट भेजी गई। इसमें लिखा कि एक कुख्यात अपराधी के विरुद्ध थानाध्यक्ष द्वारा सहानुभूति रखना अब तक कार्रवाई न करना सत्य निष्ठा को संदिग्ध करता है।


सीओ की रिपोर्ट के मुताबिक निलंबित थानेदार विनय तिवारी का विकास दुबे के घर आना जाना था। यदि थानेदार के खिलाफ कार्रवाई न की गई तो कोई गंभीर घटना घट सकती है। यह रिपोर्ट पुलिस कार्यालय आई और फाइलों में दब रह गई। जिसका नतीजा यह निकला कि विकास दुबे ने सीओ समेत 8 पुलिस कर्मचारियों की हत्या कर दी।

विनय तिवारी ने बताया था पूरा क्राइम सीन : 

चौबेपुर थाने के पूर्व एसओ को एसटीएफ बिकरू गांव लेकर पहुंची। एसटीएफ ने पूरे मामले में विनय का बयान दर्ज किया था। इसके बाद मुठभेड़ के दौरान पुलिस वहां कैसे फंसी और गोलियां कहां से चल रही थी…? पूरे क्राइम सीन को सही से समझा गया और एसओ कैसे बच गए, उन्हें एक खंरोच तक नहीं आई यह भी पूछा।

इसके बाद टीम उन्हें लेकर लौट गई। कहा ये जा रहा है कि मास्क लगा होने से पहले तो लोग विनय तिवारी को पहचान नहीं सके। इसके बाद टीम ने पूछताछ करते हुए एक-एक मुआयना शुरू किया तो लोग समझ सके कि पूर्व एसओ को लेकर एसटीएफ जांच करने पहुंची है। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि विनय खुद ही नहीं थाने की पूरी टीम लेकर सबसे पीछे चल रहे थे।

इसके चलते उन्हें खरोच तक नहीं आई थी और वह मुठभेड़ के दौरान की पूरी जानकारी भी नहीं दे सके। जबकि क्षेत्र की जानकारी से अनभिज्ञ सीओ और एसओ अपराधियों के जाल में फंस गए। इसके चलते आठ पुलिस कर्मियों की जान चली गई और सात गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए।

अलग थानों को सौंपी गई जांच

अब चौबेपुर थाने से अधिकारियों का विश्वास उठ चुका है। ऐसे में थाने में तैनात पुलिस कर्मियों के अलावा दूसरे थानों से दरोगाओं को अलग अलग बिन्दुओं पर जांच के लिए तैनात किया गया है। वहीं अधिकारियों का मानना है कि जब तक चौबेपुर थाने के प्रत्येक पुलिस कर्मियों की जांच सही से नहीं हो जाती तब तक इस केस में उनसे कोई काम नहीं लिया जाएगा।

इसी तरह से कोतवाली के दरोगा को असलहों के सत्यापन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह से घटना में ऑपरेशनल कार्य को करने के लिए कलक्टरगंज, नौबस्ता, बर्रा, स्वरूप नगर आदि थानों में दरोगाओं को लगाया गया है। चौबेपुर थाने की पुलिस को इस पूरे मामले से दूर ही रखा गया है।

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