शिवपाल सिंह यादव की ‘घर वापसी’ की तैयारी, सपा ने विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका ली वापस

शिवपाल सिंह यादव की 'घर वापसी' की तैयारी, सपा ने विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका ली वापस

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने समाजवादी पार्टी को शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए दायर की गई याचिका को वापस लेने की इजाजत दे दी है। नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने पिछले दिनों सपा की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष से याचिका वापस लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। विधानसभा अध्यक्ष ने गुरुवार को इसकी मंजूरी दे दी। समाजवादी पार्टी के इस कदम से सियासी गलियारों में अखिलेश-शिवपाल के बीच सुलह होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

मालूम हो कि समाजवादी पार्टी ने पिछले साल 4 सितंबर को मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की थी। विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक, अभी याचिका का परीक्षण किया जा रहा था कि इसी बीच नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने 23 मार्च 2020 को यह कहते हुए कि याचिका प्रस्तुत करते वक्त कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख और साक्ष्य संलग्न नहीं किए जा सके थे। इसलिए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए।


मुलायम परिवार में मनमुटाव के बाद पार्टी में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के रूप में दो धड़े बन गए हैं। बोलचाल न होने के बावजूद शिवपाल 2017 विधानसभा का चुनाव सपा के टिकट पर ही जसवंतनगर से लडे़ और जीत गए थे। लेकिन बाद में अखिलेश से संबध इस कदर बिगड़े कि शिवपाल ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बना ली और पिछले साल लोकसभा चुनाव में अलग से उम्मीदवार भी उतारे।

मेल-मिलाप की संभावना

सूत्रों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष की तरफ से भले ही याचिका वापस लेने का कारण जरूरी साक्ष्य व अभिलेखों को संलग्न करना बताया गया हो, लेकिन मामला बस इतना ही नहीं है। मुलायम सिंह यादव शुरू से ही अपने परिवार में हुए इस बिखराव से चिंतित व परेशान हैं। शिवपाल भी काफी दिनों से समाजवादियों के एक मंच पर आने की वकालत करते रहे हैं। पिछले दिनों अखिलेश यादव ने भी समाजवादियों के एक होने की जरूरत स्वीकार की थी।

बताया जाता है कि पिछले दिनों मुलायम सिंह के अस्वस्थ होने पर परिवार के सदस्य कई बार एक साथ बैठे और आपसी सुलह के बारे में बातचीत हुई। कुछ हिचक के बावजूद किसी न किसी रूप में एक दिखने और मुलायम की राजनीतिक पूंजी को संजोए रखने की जरूरत महसूस की गई। शिवपाल सिंह यादव की सदस्यता रद्द करने से जुड़ी याचिका वापस लेने का मामला इसी का नतीजा माना जा रहा है।



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