गुजरात कैडर के बर्खास्त IPS संजीव भट्ट को 3 दशक पुराने मामले में आजीवन कारावास, जामनगर सेशन कोर्ट का फैसला

गुजरात कैडर के बर्खास्त IPS अधिकारी संजीव भट्ट को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। तीन दशक पुराने हिरासत में मौत मामले में सुनवाई करने हुए जामनगर सेशन कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत के 30 साल पुराने एक मामले में 11 अतिरिक्त गवाहों का परीक्षण करने का अनुरोध करने वाली बर्खास्त IPS अधिकारी संजीव भट्ट की याचिका पर विचार करने से 12 जून को इनकार कर दिया था। भट इस मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। भट्ट ने शीर्ष अदालत का रुख कर कहा था कि मामले में एक उचित और निष्पक्ष फैसले तक पहुंचने के लिए इन 11 गवाहों का परीक्षण जरूरी है।


सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद निचली अदालत के फैसला सुनाने का रास्ता साफ हो गया था। इसी मामले में आज 20 जून को गुजरात की निचली अदालत जामनगर ने फैसला सुनाया है।

1990 का है मामला

मामला 1990 का है, जब गुजरात के जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी। संजीव भट्ट उस समय जामनगर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) थे। इस दौरान 133 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया जिनमें 25 लोग घायल हुए थे। इस दौरान न्यायिक हिरासत में रहने के बाद एक आरोपी प्रभुदास माधवजी वैश्नानी की मौत हो गई और इस मामले में पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया गया। इस संबंध में संजीव भट्ट व अन्य पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरु हुई। लेकिन गुजरात सरकार ने मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी। मगर फिर 2011 में गुजरात सरकार ने भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी।


गुजरात दंगों के दौरान चर्चा में आए थे संजीव भट्ट

गौरतलब है कि गुजरात कैडर के चर्चित IPS संजीव भट्ट को बगैर अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सरकारी वाहन का दुरुपयोग करने के आरोप में 2011 में निलंबित कर किया गया था। बाद में, अगस्त, 2015 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। भट्ट 2002 गुजरात दंगों के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के कारण भी चर्चा में आए थे।

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