World Kidney Day 2019: जीवनशैली होगी दुरुस्त तो किडनी की बीमारियों से रहेंगे मुक्त

World Kidney Day 2019: जीवनशैली होगी दुरुस्त तो किडनी की बीमारियों से रहेंगे मुक्त

दुनिया भर में किडनी की बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार इसे क्रॉनिक किडनी डिजीज कहते हैं। इस बीमारी से उबरने के लिए और लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 14 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता हैं।

हमारे देश में किडनी खराब होने के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। उम्रदराज लोग ही नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं । सही जानकारी नहीं होने के कारण भी लोग अनजाने में इसकी चपेट में आ रहे हैं। पहला, लोगों को किडनी से संबंधित बीमारियों के बारे में अधिक जानकारी ही नहीं हैं। दूसरा, किडनी की बिमारी का इलाज भी देश भर के गिने-चुने अस्पतालों में ही सुविधा उपलब्ध है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण है इस बीमारी के इलाज का खर्च आज भी आमलोगों की पहुंच के बाहर है।


क्या है किडनी

किडनी लगभग 140 मील लम्बी नलिकाओं तथा लाखों छलनियों से बने होते हैं। किडनी के इन इकाईयों को नैफ्रॉन कहते हैं। एक किडनी में लगभग 10 लाख इकाई होती हैं। नलिकाएं हमारे शरीर के लिए छने द्रव के उपयोगी सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम आदि दुबारा सोख लेती हैं तथा बेकार पदार्थो को यूरीन के रूप में बाहर निकाल देती हैं।

कैसे काम करता है हमारा किडनी


किडनी हमारे शरीर के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। ये हमारे शरीर के बेकार तथा तरल पदार्थों को शरीर से बाहर निकालकर रक्त को साफ करते हैं। प्रतिदिन किडनी 200 लीटर रक्त को प्रोसोस करने के साथ लगभग प्रतिदिन 2 लीटर यूरीन उत्पन्न करते हैं। ये हमारे शरीर के पानी के मात्रा को संतुलित करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण करने में  सहायता करते हैं।

किडनी रोग के लक्षण

बहुत से लोगों को किडनी रोग के गंभीर लक्षण तबतक समझ में नहीं आते जब तक उनका रोग एडवांस स्टेज में नहीं पहुंच जाता। इस रोग के  कई लक्षण हैं, जैसे- अधिक थका हुआ महसूस होना, भूख का कम लगना, नींद आने में समस्या आना, मांसपेशियों में खिंचाव, पैरों में सूजन, बार-बार पेशाब का लगना, छाती में दर्द होना इत्यादी।

क्या है बचाव

लोगों को हमेशा संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए।  शराब के सेवन से बचें। नियमित रूप से व्यायाम करें। खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखे। नमक का उपयोग जरूरत भर करें। शरीर के वजन पर ध्यान रखें।


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