परंपरा : झाबुआ में ग्वालों के ऊपर से गुजरी गायें

झाबुआ, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)| मन्नत की कामना और मन्नत उतारने के लिए लोग तरह-तरह के जतन करते हैं। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में तो मन्नतधारी सड़क पर लेटकर अपने उपर से गायों को निकलने देते हैं। मान्यता है कि दीपावली के अगले दिन पड़वा पर ऐसा करने से मन्नत पूरी होती है। झाबुआ के पेटलावद कस्बे के बाछीखेड़ा सहित अन्य गांवों में गाय और ग्वालों के पारस्परिक रिश्तों का पर्व गाय-गोयरी पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर गायों को खास तौर से मोर पंख, मेहंदी और रंग लगाकर सजाया जाता है, जिन्हें लोग अपने ऊपर से गुजारते हैं। जिनके ऊपर पैर रखकर गाय निकल जाती है वे अपने को भाग्यशाली मानते हैं। साथ ही चोटिल न होने का दावा किया जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गायों के पैर पड़ने से संबंधित व्यक्ति की मन्नत पूरी होती है या उतर जाती है। उसी के लिए लोगों में दीपावली के अगले दिन सड़क पर पेट के बल लेटकर गाय को गुजारने की होड़ मची रहती है। सोमवार को बड़ी संख्या में इस तरह के आयोजन किए गए, और गायों के हुजूम को लोगों के ऊपर से गुजारा गया।


स्थानीय लोग बताते हैं कि दीपावली के अगले दिन सुबह और शाम दो चरणों में यह परंपरा निभाई जाती है। सुबह के समय कई स्थानों पर यह परंपरा निभाई गई। इसे देखने के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए। सड़क पर लेटने वालों में से कई ने सिर की सुरक्षा के लिए कपड़े आदि बांध रखे थे, वहीं गायों को तरह-तरह से सजाया गया था।

कुछ लोगों का कहना है कि वैसे गाय-गोयरी का आदिवासी बोली में अर्थ गायों को चराने वाला होता है। गायों के पैरों में लेटकर ग्वाले उससे क्षमा याचना करते हैं कि जंगल में चराने के दौरान पूरे साल उसे मारा-पीटा जाता है।

 


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