Love Jihad: लव जिहाद कानून पर अशोक गहलोत ने BJP पर साधा निशाना, कहा- ‘विवाह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है’

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Love Jihad: लव जिहाद कानून पर अशोक गहलोत ने BJP पर साधा निशाना, कहा- 'विवाह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है'

बीते कुछ दिनों से देश में लव जिहाद (Love Jihad) पर बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे ने तब और रफ्तार पकड़ ली जब इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है।

इसके बाद यूपी (UP) के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने जौनपुर जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि, “शादी के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। इसको मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। इसलिए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का काम करेंगे। एक प्रभावी कानून बनाएंगे। इस देश में चोरी-छिपे, नाम और धर्म छुपाकर जो लोग बहन-बेटियों के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनको पहले से मेरी चेतावनी है।”


इससे पहले मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने लव जिहाद को लेकर कहा था कि, “मध्यप्रदेश में लगातार सामने आ रहे लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए सरकार कानून लाएगी। सरकार इसे लेकर धर्म स्वातंत्र्य कानून बना रही है। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाया जाएगा। कानून लाए जाने के बाद गैर जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा और 5 साल की कठोरतम सजा दी जाएगी। इसमें बहकाना, प्रलोभन देना और डराना-धमकाना अपराध होगा।”

अब इस मुद्दे पर राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने बीजेपी (BJP) पर निशाना साधा है।

उन्होंने ट्वीट (Tweet) करते हुए लिखा है कि, “लव जिहाद भाजपा द्वारा राष्ट्र को विभाजित करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए निर्मित एक शब्द है। विवाह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है, इस पर अंकुश लगाने के लिए एक कानून लाना पूरी तरह से असंवैधानिक है और यह कानून की किसी भी अदालत में खड़ा नहीं होगा। लव में जिहाद का कोई स्थान नहीं है।”


वो आगे लिखते हैं कि, “वे राष्ट्र में एक ऐसा वातावरण बना रहे हैं, जहां सहमति व्यक्त करने वाले राज्य की शक्ति की दया पर होंगे। विवाह एक व्यक्तिगत निर्णय है और वे उस पर अंकुश लगा रहे हैं, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनने जैसा है।”

उन्होंने आगे लिखा कि, “यह सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, ईंधन सामाजिक संघर्ष को बाधित करने और राज्य जैसे संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना करने के लिए एक समझौता है, जो किसी भी आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करता है।”

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