डेंगू के लिए कारगर फीफाट्रोल पर होगा कोरोना के लिए शोध

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नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। आयुर्वेद वैज्ञानिक कोरोना के इलाज की खोज में जुट गए हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कोरोना के इलाज में आयुर्वेदिव दवा फीफाट्रोल की उपयोगिता की खोज की योजना बनाई है। यह दवा डेंगू के इलाज में कारगर साबित हो चुकी है। इस संबंध में उन्होंने आयुष मंत्रालय की गठित टास्क फोर्स को प्रस्ताव भेजा है।

भारत सरकार की फार्माकोपिया समिति के पूर्व सदस्य एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केएन द्विवेदी ने कहा, “आज दुनिया कोविड का उपचार तलाश रही है। हमें भी अपने परंपरागत चिकित्सा का इस्तेमाल करना चाहिए। इसीलिए फीफाट्रोल पर मानव ट्रायल करके कोरोना वायरस का आयुर्वेदिक उपचार पता करने की योजना है।”


उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर आयुर्वेद का ट्रायल दुनिया में कहीं नहीं हुआ है। भारत में यह अनूठा प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फीफाट्रोल डेंगू के इलाज में काफी कारगर है अब एमिल फॉर्मास्युटिकल के सहयोग से उन्होंने इस रिसर्च का प्रस्ताव टास्क फोर्स को भेजा है।

प्रस्ताव में लिखा है कि फीफाट्रोल 13 जड़ी बूटियों से तैयार एक एंटी माइकोबियल औषधीय फार्मूला है जिसमें शामिल पांच प्रमुख बूटियों में सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिपुवन कीर्ति रस तथा मत्युंजय रस शामिल हैं, जबकि आठ औषधों के अंश मिलाये गये हैं जिनमें तुलसी, कुटकी, चिरयात्रा, मोथा गिलोय, दारुहल्दी, करंज तथा अप्पामार्ग शामिल हैं।

इतना ही नहीं फीफाट्रोल पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी इस पर अध्ययन कर चुका है जिसमें यह दवा आयुर्वेद एंटीबॉयोटिक्स के रूप में साबित हुई है। शोध के दौरान बैक्टीरिया संक्रमण रोकने में यह कारगर मिली इसीलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में यह सहायक है।


आयुष मंत्रालय ने एक आंतरिक टास्क फोर्स भी गठित किया है जोकि देशी उपचार पद्धतियों की उन महत्वपूर्ण दवाओं का अध्ययन कर रहा है। इन्हें कोविड के उपचार में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस आंतरिक टास्क फोर्स ने ऐसी दवाओं के ब्यौरे एकत्र करने शुरू कर दिए हैं।

शोधकर्ताओं, प्रमुख दवा निर्माताओं एवं शोध संस्थानों से आगे शोध और क्लिनिकल ट्रायल के लिए ऐसी दवाओं के प्रस्ताव मांगे गए हैं जो कोविड से निपटने में कारगर हो सकती हैं। अब तक कई प्रस्ताव मिल चुके हैं जिनमें से एक फीफाट्रोल भी है। सरकार ने इंटर डिसिप्लेनरी कमेटी बनाई है ताकि उसमें आधुनिक मेडिसिन के चिकित्सा विशेषज्ञों की मदद से दवाओं के आधुनिक चिकित्सा के मानकों पर परखा जा सके।

–आईएएनएस

(इस खबर को न्यूज्ड टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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