धारा 370 को लेकर सरकार के फैसले पर जम्मू-कश्मीर के पहले गवर्नर कर्ण सिंह क्या बोले?

धारा 370 को लेकर सरकार के फैसले पर जम्मू-कश्मीर के पहले गवर्नर डॉ कर्ण सिंह क्या बोले?

सरकार के जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) को विशेष राज्‍य का दर्जा देने से संबंधित आर्टिकल 370 (Article 370)  को हटाने के फैसले पर कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह (Karan Singh) की प्रतिक्रिया सामने आई है। जम्मू-कश्मीर के सदरे रियासत (Sadr-i-Riyasat) और प्रथम राज्यपाल (Governor of Jammu Kashmir) रहे डॉ कर्ण सिंह  (Karan Singh) ने कहा है कि सरकार के इस कठोर फैसले को संसद से लेकर जम्मू और लद्दाख (Ladakh) समेत पूरे देश में समर्थन मिला है। हालाँकि, कई स्तरों पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।

जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक महाराजा हरि सिंह के पुत्र 88 वर्षीय कर्ण सिंह (Karan Singh) ने एक पत्र में लिखा है कि संसद में जितनी तेजी से ये सब हुआ उसने हम सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं इन घटनाक्रमों की एकमुश्त निंदा से सहमत नहीं हूँ।”


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कर्ण सिंह ने कहा, “इस फैसले के कई सकारात्मक पहलू भी हैं। मसलन, केंद्र शासित प्रदेश के रूप में लद्दाख का उदय, अनुच्छेद 35 ए में लिंग के आधार पर भेदभाव का खात्मा, एक ताजा परिसीमन जिससे जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों के बीच राजनीतिक शक्ति का उचित विभाजन, अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण आदि।”

कश्मीर के संबंध में कर्ण सिंह (Karan Singh) ने लिखा, “मुझे लगता है कि राजनीतिक बातचीत जारी रखना महत्वपूर्ण है और दोनों प्रमुख क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रविरोधी कहकर खारिज करना ठीक नहीं है।”

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उन्होंने कहा, “हर कीमत पर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना चाहिए और हिंसा से बचना चाहिए। कोशिश यह होनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा मिले ताकि यहाँ के लोग कम-से-कम देश के बाकी हिस्सों को मिलने वाले राजनीतिक अधिकारों का आनंद उठा सकें। मेरी एकमात्र चिंता राज्य के सभी वर्गों और क्षेत्रों के कल्याण के लिए है।”

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बता दें, जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के बाद डॉ. कर्ण सिंह (Karan Singh) 20 जून 1949 को जम्मू-कश्मीर के राज्याधिकारी बने और बाद में 17 नवंबर 1952 से लेकर 30 मार्च 1965 तक सदरे रियासत रहे। डॉ. कर्ण सिंह 30 मार्च 1965 को जम्मू-कश्मीर के पहले राज्यपाल बने।

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