आखिर क्यूं प्रियंका गाँधी ने पूर्वांचल कांग्रेस की जिम्मेदारी ली ?

आखिर क्यूं प्रियंका गाँधी ने पूर्वांचल कांग्रेस की जिम्मेदारी ली ?

तो आखिरकार प्रियंका गांधी वाड्रा सक्रिय राजनीति में आ गई हैं. उन्हें पार्टी महासचिव बनाते हुए उत्तर प्रदेश-पूर्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है. लोकसभा चुनाव (Lok sabha elections 2019) को देखते हुए इसे कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है, ऐसे में देश में जगह-जगह कांग्रेस कार्यकर्ता पटाखे फोड़कर जश्न मना रहे हैं | कांग्रेस के कई बड़े-बड़े नेता यह कहते दिख रहे हैं कि प्रियंका गांधी के पार्टी में आने से कार्यकर्ता और ज्यादा उत्साह से लबरेज हो गए हैं. वहीं एनडीए खेमा प्रियंका के कांग्रेस महासचिव बनने को ज्यादा तवज्जो नहीं देने की बात कह रहा हैं | उनका(एनडीए) मानना यह है, कि गठबंधन से नकारे जाने के बाद कांग्रेस खुद को अकेला महसूस कर रही थी, “ऐसा नहीं है कि प्रियंका राजनीति में नहीं थी- वे पिछले कई वक़्त से अनौपचारिक रूप से राजनीति कर रही थी | चलिए ऐसे में समझने की कोशिश करते हैं कि क्या प्रियंका गांधी के आने से बीजेपी को नुकसान होगा? आखिर प्रियंका गाँधी ने पूरे यूपी के बजाय सिर्फ पूर्वांचल यूपी की कमान ही क्यूं ली- जबकि वे जानती है कि 2019 के चुनाव में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण यूपी की 80 सीटें है |

नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए

प्रियंका गाँधी के कांग्रेस पार्टी महासचिव उत्तर प्रदेश-पूर्व बनाने का दूसरा प्रमुख कारण नरेंद्र मोदी भी है | जिस प्रकार साल 2014 में भाजपा ने स्मृति ईरानी को राहुल गाँधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से उतारकर सभी राजनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान खींचा था, ठीक उसी प्रकार प्रियंका गाँधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उतारकर कांग्रेस इस रणनीति को दोहरा सकती है |


ऐसा माना जा रहा है कि अब प्रियंका गाँधी के आने से प्रधानमंत्री को अपने संसदीय क्षेत्र में और ज्यादा मशक्कत करनी पड़ सकती है | प्रियंका गाँधी हमेशा से सभी की पहली पसंद रही है, ऐसे में अब प्रधानमंत्री मोदी जहां अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कभी-कभार ही रैली करते थे | इस परिस्थिति में उन्हें फ्रीलांसर कि जगह फुल-टाइम वक़्त गुजारना होगा | दूसरी ख़ास बात ये भी है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं |

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता

पी एल पुनिया(बाराबंकी ), ललितेश त्रिपाठी(मिर्जापुर), राजेश मिश्रा(वाराणसी), नदीम जावेद(जौनपुर), आरपीएन सिंह(पडरौना), अजय राय(वाराणसी), श्री प्रकाश शुक्ला(कानपुर), अजय कुमार लल्लू(पडरौना), महिराम रतना(प्रतापगढ़ ), प्रमोद तिवारी(कानपुर देहात), तलत अज़ीज़(संत कबीर नगर), कमल किशोर(बहराइच), और अनुराग आलम(फूलपुर) ये सभी पूर्वांचल यूपी के नामी चेहरे है | ऐसे में प्रियंका गाँधी के पार्टी में आने से ये सभी नेता उत्तर प्रदेश कांग्रेस में फिर से जान फूंकने की कोशिश करेंगे |

उत्तर प्रदेश और यहाँ के परंपरागत वोट

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के परंपरागत वोटरों में दलित, मुसलमान और ब्राह्मण माने जाते थे. लेकिन मौजूदा समय में तीनों तबका अलग-अलग पार्टी के साथ अलग-अलग समय(लोकसभा, विधानसभा,और स्थानीय निकाय चुनावों) में जुड़ा है, दलित समुदाय हमेशा बहुजन समाज पार्टी के खेमे में दिखाई देते रहे हैं, मुसलमान समाजवादी पार्टी के, जबकि ब्राह्मणों ने भारतीय जनता पार्टी को अब अपना लिया है | ऐसे में प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस की स्थिति में बहुत बदलाव होगा, ये बात पूर्ण दावे से नहीं कही जा सकती, क्योंकि पार्टी का परंपरागत मतदाता भी छिटक चुका है और प्रदेश के ज़्यादातर हिस्सों में पार्टी का संगठन भी अब उतना मज़बूत नहीं है, लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में यह एक संजीवनी जैसा है |


साल 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने पूर्वांचल यूपी की कुल 21 में से 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी, तो वही शेष सीटों पर उसने विरोधियों को भी कड़ी चुनौती दी थी, ऐसे में अब यह कयास भी लगाए जा रहे है की शायद कांग्रेस 2009 की कहानी दोहरा सकती है | ऐसे में प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार संभालने की जिम्मेदारी देने से ये ज़ाहिर हो गया है कि कांग्रेस इन क्षेत्रों में मुक़ाबले को तिकोना बनाने की कोशिश कर रही है |

 

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