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राजनीति

भोपाल की मोदी रैली के लिए बस ऑपरेटरों ने बस देने से किया इनकार

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भोपाल की मोदी रैली के लिए बस ऑपरेटरों ने बस देने से किया इनकार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ के लिए राज्यभर से कार्यकर्ता लाने का जिम्मा प्रदेश इकाई को सौंपा गया है, मगर बस ऑपरेटरों ने पुराना बकाया का भुगतान न होने के कारण बसें देने से इनकार कर दिया है। वहीं राज्य के परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि बस संचालकों से बातचीत हो गई है। बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधि ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान बताया कि पूर्व में आयोजित भाजपा की रैलियों में राज्यभर से बसों में भरकर कार्यकर्ता लाए गए। उसका बकाया लगभग तीन करोड़ 17 लाख रुपये है, मगर उसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है। बस ऑपरेटरों ने पहले बकाया के भुगतान की मांग की है।

बस ऑपरेटरों का कहना है कि पूर्व में भी भाजपा और सरकार के कार्यक्रम हुए, जिनमें बस संचालकों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लिहाजा, बस ऑपरेटर अपनी इस मांग पर अड़े हैं कि पुराना भुगतान किया जाए, उसके बाद ही वे बसों को भोपाल भेजेंगे।

शिवराज ने कहीं गले में घंटी तो नहीं बांध ली!

राज्य के परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि बस ऑपरेटरों से बातचीत हो गई है। समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।

भाजपा मंगलवार को भोपाल के जम्बूरी मैदान में होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक आयोजन होने का दावा कर रही है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर बसें नहीं मिलीं तो 10 लाख कार्यकर्ता भोपाल कैसे पहुंचेंगे।

–आईएएनएस

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन: PM मोदी ने किया बोस से जुड़े संग्रहालय का उद्घाटन

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तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आज जन्मदिन है। इस मौके पर दिल्ली में नेताजी से जुड़े संग्रहालयों का उद्घाटन हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को दिल्ली के लाल किले में तैयार किए गए चार संग्रहालयों का उद्घाटन किया। इसकी शुरुआत खास तौर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर आधारित संग्रहालय के उद्घाटन के साथ हुई। प्रधानमंत्री ने सुबह लाल किले में यह संग्रहालय सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर राष्ट्र को समर्पित किया। इस संग्रहालय में बोस की जिंदगी से जुड़ी कईं महत्वपूर्ण चीजें रखी गईं हैं।इसे 26 जनवरी के बाद आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज पर संग्रहालय में सुभाष चंद्र बोस और INA से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। वहीं नेताजी द्वारा इस्तेमाल की गई लकड़ी की कुर्सी और तलवार के अलावा INA से संबंधित पदक, बैज, वर्दी और अन्य वस्तुएं भी शामिल हैं।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने जलियांवाला बाग पर आधारित याद-ए-जलियां संग्रहालय का शुभारंभ कर इसका अवलोकन किया। यहां 2 और संग्रहालय बनाए गए हैं जिनमें 1857 में हुई स्वतंत्रता की पहली लड़ाई से संबधित संग्रहालय, आजादी के दीवाने शामिल हैं। 26 जनवरी के बाद इन संग्रहालयों को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

मोदी ने बदला था अंडमान के तीन द्वीपों के नाम, नेताजी के नाम पर रखा
मालुम हो कि आजाद हिंद फौज ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 75 साल पहले तिरंगा फहराया था। इसी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर कुछ दिन पहले ही PM नरेंद्र मोदी अंडमान के दौरे पर गए थे। तब उन्होंने 3 द्वीपों का नाम सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखने का ऐलान किया था। अंडमान के हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप, नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप और रॉस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र द्वीप के नाम से जाना जाएगा।

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भारत

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का 56 फीसदी फंड सिर्फ प्रचार पर खर्च

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'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का 56 फीसदी फंड सिर्फ प्रचार पर खर्च beti bachao beti padhao major chunk of funds spent on publicity

22 जनवरी, 2015 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ स्कीम की शुरुआत की। इसका पहला उद्देश्य देश में घटते लिंग अनुपात को बढ़ाना था और दूसरा लड़कियों को लेकर पिछड़ी सोच में बदलाव करना था। सरकार की इस योजना को तीन मंत्रालयों महिला और बाल विकास, मानव संसाधन विकास, और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के माध्यम से देशभर में लागू करने का फैसला किया गया। इस स्कीम के लागू होने के चार साल बाद केंद्र सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उससे पता चलता है कि इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ पब्लिसिटी था।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ स्कीम पर वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक आवंटित हुए कुल फंड का 56 फीसदी से ज्यादा भाग ‘मीडिया संबंधी गतिविधियों’ (यानी की प्रचार-प्रसार) पर खर्च किया गया। इसके विपरीत, 25 फीसदी से कम धनराशि जिलों और राज्यों को क्रमवार बांटी गई, जबकि 19 फीसदी से ज्यादा धनराशि जारी ही नहीं की गई।

ये हैरान करने वाले आंकड़े इसी साल 4 जनवरी को लोकसभा में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने जवाब में दिए हैं। पांच सांसदों कपिल पाटिल और शिवकुमार उदासी (बीजेपी के वर्तमान सांसद है ), कांग्रेस की सुष्मिता देव, तेलंगाना राष्ट्र समिति के गुथा सुकेंदर रेड्डी और शिवसेना के संजय जाधव ने सदन में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को लेकर सवाल रखा था।

अब तक नरेंद्र मोदी सरकार इस स्कीम पर कुल 644 करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है। इनमें से केवल 159 करोड़ रुपये ही जिलों और राज्यों को भेजे गए हैं। बाकी का शेष भाग ज्यादातर या तो प्रमोशन में खर्च हुआ है, या फिर विविध खर्चों में।

“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना सफल या विफल?

साल 2015 में “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” स्कीम के पहले चरण में, सरकार ने अपेक्षाकृत कम लिंगानुपात वाले कुल 100 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया। उसके बाद दूसरे चरण में, सरकार ने 61 और जिलों को इस योजना से जोड़ा। इन 161 जिलों में बाल लिंगानुपात के आधार पर योजना आंशिक तौर पर सफल रही है। 161 में से 53 जिलों में, 2015 से बाल लिंग अनुपात में गिरावट आई है। इनमें से पहले चरण के 100 में से 32 जिले और दूसरे चरण के 61 में से 21 जिले शामिल हैं। हालांकि, बाकी जिलों में बाल लिंगानुपात में वृद्धि हुई है।

कई विभागीय विशेषज्ञों का कहना है कि स्कीम की सीमित सफलता काफी हद तक इस तथ्य की वजह से है कि सरकार धन को प्रभावी रूप से जारी नहीं कर रही है और यह शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में ठोस हस्तक्षेप के बजाय प्रचार पर बहुत ज्यादा खर्च कर रही है। सरकार द्वारा आवंटित 644 करोड़ में से महज 159 करोड़ रूपए ही जिलों और राज्यों को भेजे गए हैं।


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राजनीति

मीसा मेरी भतीजी, कटा हाथ भी आर्शीवाद के लिए उठेगा : रामकृपाल यादव

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मीसा मेरी भतीजी, कटा हाथ भी आर्शीवाद के लिए उठेगा : रामकृपाल यादव

पटना| केंद्रीय मंत्री और बिहार के पाटलिपुत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रामकृपाल यादव ने ‘हाथ काट देने’ वाले मीसा भारती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में ऐसा बयान कहीं से शोभा नहीं देता, फिर भी भतीजी के लिए उनका हाथ आशीर्वाद के लिए ही उठेगा। मीसा भारती राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राज्यसभा सांसद हैं।

पाटलिपुत्र क्षेत्र के सांसद यादव ने यहां संवाददाताओं से कहा, “मीसा भारती मेरी भतीजी है और वह मेरी बेटी के समान है। अगर, मेरे हाथ काट देने से उसकी संतुष्टि होती है, तो मैं उसके लिए तैयार हूं। मेरा कटा हुआ हाथ भी उसे आशीर्वाद देने के लिए ही उठेगा।”

उन्होंने कहा, “हमारी शुभकामना हमेशा उसके साथ है। भाजपा सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा बयान जनता का सेवक नहीं दे सकता, बल्कि कोई शासक ही दे सकता है।”

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती ने 16 जनवरी को पटना के विक्रम प्रखंड में पाटलिपुत्र के सांसद रामपाल यादव का हाथ काटने की बात कही थी। मीसा के इस बयान का वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें मीसा कहती नजर आ रही हैं, “रामपाल यादव कुट्टी (चारा) काटते थे। उनके लिए हमारे मन में बहुत सम्मान था। उनको हाथ पकड़कर राजनीति करना सिखाया गया, लेकिन उनके लिए हमारा यह सम्मान तब खत्म हो गया जब वह सुशील कुमार मोदी की किताब को हाथ में लेकर खड़े थे। उस समय मेरा मन किया कि उसी चारा काटने वाली मशीन से उनके हाथ काट दूं।”

उल्लेखनीय है कि रामपाल यादव पहले राजद में थे और उन्हें लालू प्रसाद का ‘हनुमान’ कहा जाता था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वे राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

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