करगिल युद्ध: पाकिस्तान के कब्जे से कैसे आजाद हुए थे भारतीय वायु सेना के पायलट नचिकेता

करगिल युद्ध: पाकिस्तान के कब्जे से कैसे आजाद हुए थे भारतीय वायु सेना के पायलट नचिकेता

भारतीय वायुसेना (IAF) द्वारा पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जैश के आतंकी कैंपों पर हवाई हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच तनातनी काफी बढ़ गई है। इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बुधवार मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान की कोशिश को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया और हमने उनके एक फाइटर विमान को मार गिराया। हालांकि, इस एक्शन के दौरान हमें एक मिग 21 विमान का नुकसान हुआ और एक पायलट भी लापता है, जिसका का पता लगाने में हम जुटे हैं। वहीं, पाक का दावा है कि भारतीय वायु सेना का लापता पायलट अभिनंदन वर्तमान उसके कब्जे में हैं।

बहरहाल, पाकिस्तान के दावों की सच्चाई की परख होनी बाकी है। ऐसी ही एक घटना 20 साल पहले कारगिल युद्ध के समय की है जब पाकिस्तान ने भारत के एक फाइटर पायलट को गिरफ्तार करने में सफलता पाई थी। उस पायलट का नाम था के. नचिकेता। इंडियन एयरफोर्स के तत्कालीन फ्लाइट लेफ्टिनेंट कंबमपति नचिकेता इकलौते ऐसे सैनिक थे जिन्हें युद्धबंदी बनाया गया। नचिकेता के दुश्मन के चंगुल में फंसने और वापस सकुशल लौटने की कहानी दिलचस्प है।मिसाइल हमले में उनका विमान क्रैश होने के बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया। लेकिन, पाकिस्तान एयरफोर्स के एक अधिकारी ने उनकी जान बचाई। आठ दिन तक काफी टॉर्चर करने के बाद उन्हें फिर से भारत को सौंपा गया।


ऐसे पकड़े गए के. नचिकेता

3 जून 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान IAF के फाइटर पायलट के नचिकेता को भारतीय वायु सेना की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में MIG 27 उड़ा रहे थे। उस वक्त उनकी उम्र 26 साल थी। 17 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित पाकिस्तानी चौकियों को तबाह करने की जिम्मेदारी दी गई थी।नचिकेता ने दुश्मन के बिलकुल करीब जाकर रॉकेट दागे और दुश्मन के कैंप पर लाइव रॉकेट फायरिंग से हमला किया। लेकिन इसी बीच उनके विमान का इंजन खराब हो गया और इंजन में आग लगने से MIG 27 क्रैश हो गया। बहुत कम ऊंचाई से नचिकेता ने विमान से बाहर कूदे। कमर के बल जमीन पर गिरने के कारण वे घायल हो गए। थोड़ी देर में पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया।

नचिकेता के नीचे गिरने के आधा घंटे बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने अपनी पिस्टल से छह राउंड फायर किए। पाकिस्तानी सैनिकों ने भी उन पर फायर किए, लेकिन वे खुशकिस्मत रहे कि एक भी गोली उन्हें नहीं लगी। इस बीच उनकी गोलियां खत्म हो गयीं और जबतक वह मैगजीन में गोलियां भरते, पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया। पकड़ते ही उन्होंने नचिकेता के साथ मारपीट शुरू कर दी। नचिकेता को बचने की कोई उम्मीद नहीं बची थी। तभी पाकिस्तान एयर फोर्स का एक अधिकारी कैसर तुफैल वहां पहुंचा। कैसर करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ऑपरेशंस का निदेशक था। अपने उग्र सैनिकों को मुश्किल से काबू करने के बाद कैसर, नचिकेता को अपने साथ एक कमरे में ले गए।

नचिकेता ने एक इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी अधिकारी कैसर ने उनके साथ दोस्ताना व्यवहार किया। उसने समझा कि वह उनके बंधक हैं और उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए उसने नचिकेता से उनके परिवार और एयर फोर्स से जुड़ने की बातें की। बाद में कैसर ने कहा भी उनके और नचिकेता के व्यक्तिगत जीवन में बहुत समानताएं मिलीं। इस कारण वे नचिकेता से प्रभावित हुए।


वहां से नचिकेता को बटालिक सेक्टर में किसी स्थान पर ले जाया गया। बाद में एक हेलीकॉप्टर से स्कार्दू। वहां उन्हें लगातार टॉर्चर कर पूछताछ की गई। नचिकेता ने कहा भी था कि हर वक्त मौत सामने नजर आती थी, लेकिन फिर भी एक उम्मीद थी कि एक दिन अवश्य वे भारत वापस लौट सकेंगे। देश के प्रति उनका लगाव इतना था कि अपने प्राणों की परवाह नहीं की और दुश्मनों को सेना की खुफिया जानकारी नहीं दी।

8 दिन बाद लौटने पर हुआ जोरदार स्वागत

नचिकेता की रिहाई के लिए भारत सरकार द्वारा की गई कोशिश के बाद उन्बें रेड क्रॉस के हवाले कर दिया गया, जो कि उन्हें भारत वापस लेकर आई। वे वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत पहुंचे। तब राष्ट्रपति केआर नारायणन और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया। उनके माता-पिता ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया।

जज्बे में नहीं आई कोई कमी

नचिकेता का साथ इतना कुछ होने के बाद भी उनका जज्बें में जरा सी भी कमी नहीं आई। युद्ध के दौरान विमान से बाहर निकलने के क्रम में कमर में आई चोट के कारण नचिकेता बाद में कभी अपनी पसंद का फाइटर प्लेन नहीं उड़ा पाए। मजबूरी में उन्हें हमेशा ट्रांसपोर्ट विमान उड़ाने पड़े। 2017 में वे ग्रुप कैप्टन के पद से रिटायर हुए।

आपको बता दें, वायु सेना में उनकी बहादुरी मेें नचिकेता को वायु सेना मेडल सम्मानित किया गया है। उनका जन्म 31 मई 1973 को हुआ था। उनके माता-पिता का नाम आर. के शास्त्री और श्रीमती लक्ष्मी शास्त्री है। उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली में केंद्रीय विद्यालय से की, जिसके बाद पुणे के करीब खडकवासला नेशनल डिफेंस अकेडमी में ट्रेनिंग लेकर वायु सेना में भर्ती हो गए थे। रिटायर होने से पहले उन्होंने 17 साल वायु सेना को अपनी सेवा दी।


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