World Suicide Prevention Day 2019: दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति कर लेता है खुदकुशी, जानिये विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से जुड़ी कुछ अहम बातें

दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति कर लेता है खुदकुशी, जानिये विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से जुड़ी कुछ अहम बातें

World Suicide Prevention Day 2019: विश्व भर में 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को आत्महत्या जैसे अपराध के प्रति जागरूक करना एवं उन्हें आत्महत्या करने से रोकना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति खुदकुशी कर लेता है और प्रत्येक तीन सेकंड पर इसकी कोशिश की जाती है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल करीब आठ लाख लोग खुदकुशी करते हैं।

आत्महत्या की प्रवृत्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी एक बड़ी समस्या है। लोगों में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने और इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से डब्ल्यूएचओ ने विश्वभर में 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या निषेध दिवस (वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे) की शुरुआत की। डब्ल्यूएचओ के इस अभियान में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) आत्महत्या निषेध अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएएसपी) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्ष 1960 में स्थापित इस संगठन में शामिल कई देशों के पेशेवर और स्वयंसेवक आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों में अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।


सुसाइड करने में युवा सबसे आगे, आर्थिक तंगी बड़ी वजह

हर साल मौत को गले लगाने वाले लाखों लोग विभिन्न कारणों से आत्महत्या करते हैं। पूरी दुनिया में होने वाले इन सुसाइड की वजह से न सिर्फ एक परिवार बल्कि एक समुदाय और पूरा देश प्रभावित होता है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में खुदकुशी करने वाले ज्यादातर लोगों की उम्र 15 से 29 बताई गई थी। आपको जानकार हैरानी होगी कि खुदकुशी करने वाले ज्यादातर लोग लो एंड मिडिल इनकम देशों से ताल्लुक रखते हैं। यानी जिन देशों में लोगों की प्रतिव्यक्ति आय बहुत ज्यादा कम है, वहां खुदकुशी के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। खुदकुशी करने वाले इस वर्ग के लोगों की तादाद 79 फीसदी है। खुदकुशी करने वाले लोगों की संख्या पूरी दुनिया में युद्ध और नरसंहार में मारे गए लोगों से भी कहीं ज्यादा है।

सुसाइड के तरीके

स्वास्थ्य पेशे से जुड़े लोग आत्महत्या को नितांत निजी और जातीय मामला भी मानते हैं। वे आत्मघाती व्यवहार के लिए कई व्यक्तिगत और सामाजिक कारकों जैसे तलाक, दहेज, प्रेम संबंध, वैवाहिक अड़चन, अनुचित गर्भधारण, विवाहेतर संबंध, घरेलू कलह, कर्ज, गरीबी, बेरोजगारी और शैक्षिक समस्या को उत्तरदायी ठहराते हैं। खुदकुशी करने वाले लोग अपनी इहलीला समाप्त करने के लिए अलग-अलग रास्ते लताशते हैं। लेकिन अधिकांश मामलों में सुसाइड के तीन तरीके देखने को मिलते हैं। सुसाइड करने के लिए अधिकतर लोग फांसी, जहरीले पदार्थ या बंदूक का इस्तेमाल करते हैं।

इन देशों में सुसाइड के मामले अधिक

पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सुसाइड के मामले दक्षिण-पूर्व एशिया से सामने आते हैं। यहां करीब 12 प्रतिशत से ज्यादा लोगों की मौत खुदकुशी की वजह से होती है। आत्महत्या के संदर्भ में यदि भारत की बात करें तो यहां आत्महत्या के आंकड़े काफी भवायह हैं। डब्ल्यूएचओ की मानें तो भारत में हर साल करीब एक लाख लोग आत्महत्या करते हैं।


देश की जरूरतों के हिसाब से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी नाकाफी हैं। तेजी से होता शहरीकरण, औद्योगीकरण और नए परिवार का स्वरूप सामाजिक बदलाव और संकट के रूप में उपस्थित हो रहा है। समाज में पारंपरिक सहयोग व्यवस्था कमजोर होने से लोग निराशा और अवसाद के समय में अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं की कमी की वजह से ऐसे कई गैर सरकारी संगठन उभरे हैं जो आत्महत्या रोकथाम में अपनी सेवाएं तत्परता से दे रहे हैं।


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